ये मलेरिया है क्या ? What Is Malaria ? How It’s Causes ? In Hindi

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आज हम एक ऐसे बीमारी के बारे में बात करेंगे जो इतनी आम है कि लगभग हर व्यक्ति को यह बीमारी एक न एक बार होती ही है , अगर नहीं हुई है तो बहुत अच्छा है । आगे आपको यह बीमारी ना हो इसके लिए हम आपको इस बीमारी के बारे में सारी जानकारी इस पोस्ट के द्वारा देंगे । तो अयिये इस बीमारी से बचने के सारे उपायों को और यह इमारी क्या है ? इन सभी को जानते हैं । हम जिस बीमारी की बात कर रहे उसको हम आम भाषा में मलेरिया ( Malaria ) कहते हैं । यह बीमारी जितनी साधारण  है उतनी ही खतरनाक भी है । इस बीमारी के कई रूप है और उसके हिसाब से उसके अलग – अलग लक्षण भी । आज हम इस बीमारी के बारे में जानेंगे कि , मलेरिया क्या है ? मलेरिया कैसे किसी को होता है ? मलेरिया के लक्षण क्या – क्या  हैं ? मलेरिया कितने प्रकार की होती है ? और भी बहुत कुछ । तो आयिये अब शुरू करते हैं ।

    मलेरिया क्या है ? ( What Is Malaria ) 

 ♦ मलेरिया  बीमारी   प्लास्मोडियम ( Plasmodium ) नाम के पैरासाइट ( प्रोटोजोआ ) से होने वाली बीमारी है और यह मच्छरों के काटने से फैलता है । यह बीमारी हर मच्छर के काटने से नहीं फैलता । यह बीमारी संक्रमित मादा एनोफिलिस ( Anopheles ) नाम के मच्छर से फैलता है । 
♦ यह मच्छर ज्यादातर रात को ही काटता है । मलेरिया आम तौर पर बरसात के मौसम में होता है क्यूंकि ये मच्छर बरसात में नाली और घरों में जमा हुए गंदे पानी में पनपते हैं और लोगों को काटने का काम करते हैं  , जिसके कारण व्यक्ति  मलेरिया से ग्रसित हो जाता है । और कई सारे समस्यायों का सामना करना पड़ता है । 
♦  शुरुआत में यह बीमारी हमारे शरीर के बाहरी हिस्सो में ही रहती है । लेकिन जब कोई संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काट लेता है , तब वह प्लासमोडियम बैक्टीरिया को उस व्यक्ति के अंदर डाल देता है । और फिर उसके बाद मल्टीपल फिजन नाम की एक प्रक्रिया होती है , उसी प्रक्रिया के द्वारा यह प्लासमोडियम बैक्टीरिया उस व्यक्ति के खून में फैल जाता है । देखते – ही – देखते वह प्लास्मोडियम का बैक्टीरिया व्यक्ति के लिवर पे अटैक कर देता है , जिस कारण वह व्यक्ति संक्रमित हो जाता है । 
♦ मलेरिया के लक्षण , मच्छर के काटने के 7 से 15 दिन बाद नजर आता है । हालांकि कुछ लोगों में महीने दिन बाद भी लक्षण नजर आता है । 
♦  बिना लक्षण के भी मलेरिया का इंफेक्शन हमारे शरीर में एक साल तक रह सकता है । यह उसी को होता है जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है या वो अपने स्वास्थ्य को लेके सचेत नहीं रहते । 
  मलेरिया कैसे होता है ? ( How It’s Cause ? ) 
मलेरिया एक कम्मुनिकेबल डिजिज है । यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है ।  अगर कोई महिला गर्भ से है तो यह गर्भवती महिला के पेट में पल रहे शिशु में भी हो जाता है । मलेरिया का बैक्टीरिया संक्रमित व्यक्ति में लगभग उसके ठीक हो जाने के बाद भी सालों तक उसके बैक्टीरिया हमारे खून में मौजूद रहते है लेकिन हमें पता नहीं चलता है क्यूंकि वो नहीं जीवित अवस्था में होते है और नहीं मरे हुए । इसलिए मलेरिया से संक्रमित व्यक्ति  करीब एक साल तक रक्तदान नहीं कर सकता है ।  जब मलेरिया से  संक्रमित व्यक्ति को एक मादा मच्छर काटती है , तो प्लास्मोडियम बैक्टीरिया उसी खून के द्वारा उस मच्छर के आगे वाले मुंह या दांत में आ जाता है । और वह मादा मच्छर अब प्लास्मोडियम बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाती है । अब कोई स्वस्थ व्यक्ति है और वही संक्रमित मादा मच्छर अगर उस व्यक्ति को काट लेती है , उसके काटने के दौरान जैसे ही मच्छर अपना दांत उस व्यक्ति ने इंजेक्ट करती है उसी दौरान वह प्लास्मोडियम बैक्टीरिया उस स्वस्थ व्यक्ति के अंदर चला जाता है और वही प्रक्रिया होती है जो ऊपर में हमें बताया था ।  और इसी कारण एक स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित हो जाता है । इसी कारण से ऐसे कई सारे व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं । 
    मलेरिया के प्रकार ? ( Types Of Malaria ) 
मलेरिया बीमारी एक ऐसी बीमारी है , जो कई प्रकार की होती है । हर प्रकार के उसके कुछ – ना – कुछ लक्षण हैं । और उसके इलाज भी उसी प्रकार हैं । 
मलेरिया कॉज करने वाला प्लाजमोडियम पैरासाइट चार प्रकार के होते हैं और यही चार प्रकार के मलेरिया बुखार भी होता है । 
1- प्लाजमोडियम मलेरिया ( Plasmodium Malaria )
2- प्लाजमोडियम ओवल ( Plasmodium Oval )
3- प्लाजमोडियम वाईवैक्स ( Plasmodium Vivax )
4- प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम ( Plasmodium Falciparum )
1- प्लाजमोडियम मलेरिया :- प्लाजमोडियम बैक्टीरिया एक प्रकार का प्रोटोजोआ है , जो कि बेनाइन मलेरिया के लिए ज़िम्मेदार  माना जाता है । यह मलेरिया ज्यादा खतरनाक नहीं होता । और यह मलेरिया प्रोटोज़ोआ लगभग हर जगह पाया जाता है । यह मलेरिया प्लाजमोडियम वाईवैक्स और प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम से बहुत कम खतरनाक होता है ।
2- प्लाजमोडियम ओवल :- यह एक परजीवी प्रोटोजोआ की प्रजाति है । यह व्यक्ति के शरीर में जाकर टर्सियन मलेरिया  से संक्रमित करता है । इसका प्लाजमोडियम फेल्सीपैरम और प्लाजमोडियम वाईवैक्स से नजदीकी संबंध है , जिसके कारण अधिकतर लोगों को मलेरिया होता है । यह इन दो प्रजातियों के मुकाबले विरल तथा मलेरिया फेल्सीपेरम से कम खतरनाक होता है । 
3- प्लाजमोडियम वाईवैक्स :- यही वो मलेरिया है जिसकी वजह से ज्यादा – से – ज्यादा लोग पीड़ित होते हैं । प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम इस मलेरिया के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है । 
4- प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम :- यह मलेरिया बुखार सबसे ख़तरनाक होता है , और सबसे ज्यादा मौतें भी इसी के कारण होती हैं । प्लाजमोडियम वाईवैक्स के बाद  दूसरा सबसे ज्यादा होने वाली बीमारी भी यही है । इसके कुछ गंभीर लक्षण हैं, जैसे , लगातार तेज बुखार आना , सर दर्द , उल्टी होना , यहां तक की व्यक्ति के दिमागों  पर भी असर पड़ता है । जिसके कारण इस रोग से पीड़ित व्यक्ति बेसुध हो जाता है । उसे पता ही नहीं होता कि वो बेहोशी में क्या – क्या  बोलने लगता है । 
        मलेरिया के लक्षण  ( Symptoms Of Malaria )
जिस प्रकार ऊपर में हमने बताया की मलेरिया चार प्रकार की होती हैं लेकिन जो सबसे ख़तरनाक होती है वो है प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम । इसी कारण हर मलेरिया के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं ।  तो आयिए उसके लक्षणों के बारे में बात करते हैं । 
👉  मलेरिया से संक्रमित व्यक्ति के शरीर में कंपकंपी होती है और उसी के साथ व्यक्ति को बहुत तेज़ ठंड भी लगती है और इसके कुछ ही दिन बाद व्यक्ति को तेज़ बुखार आ जाता है  और ये बुखार 3 से 4 दिन तक रहता है और फिर पसीना आकर बुखार उतर जाता है और यह प्रक्रिया दिन में दो बार और रात में दो बार होती है । 
👉  सर और हाथ पैरों , खासकर जोड़ो में तेज़ दर्द हो सकता है । 
👉 उल्टी होना या जी मचलना  भी स्वाभाविक है ।
👉 शरीर में  कमजोरी या थकान  का ज्यादा महसूस होना ।
👉 सांस फूलना  ।
👉 आंखो की पुतलियों का रंग पीला होना । 
 मलेरिया के जांच के लिए ब्लड टेस्ट ( Malaria Blood Test )
1- ब्लड स्मियर ( Blood Smear ) :- ( Malarial Parasite ) इस टेस्ट के माध्यम से ब्लड का स्लाइड पर स्मियर  बना कर फिर उसको माइक्रोस्कोप में देखा जाता है और खून में मौजूद  प्लाजमोडियम पैरासाइट का पता लगाया जाता है । यह टेस्ट सबसे सस्ता होता है और सबसे अच्छा भी होता है । 
2- मलेरिया एंटीजन टेस्ट :– ( प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम / प्लाजमोडियम वाईवैक्स ) यह टेस्ट रैपिड किट से होता है , यह प्रेगनेंसी कीट की तरह होता है और 10 मिनट में रिजल्ट दे देता है । इस  टेस्ट  से ब्लड में मौजूद प्लाजमोडियम पैरासाइट  ( Plasmodium Falciperum / Plasmodium Vivax ) एंटीजन का पता लगाया जाता है । 
3- Malaria  RT – PCR :- इस टेस्ट से एंटीजन – एंटीबॉडी को डिटेक्ट किया जाता है । यह टेस्ट बहुत ही रेयर  होता है । 
   मलेरिया में खान – पान ( Diet In Malaria )
 👉 क्या खाएं :-
♦ चाय का सेवन करे अदरक डाल के । 
♦ खिचड़ी का सेवन करें । 
♦ अमरूद का भी सेवन  करें । 
♦ नींबू – पानी का भी सेवन कर सकते हैं । 
♦ रोटी खाने का प्रयास करें ।
♦ हरी सब्जियों को खाने में लाएं ।
👉 क्या न खाएं :- 
♦ जंक फूड का सेवन एकदम ना करें । 
♦ ठंडे पनी को एकदम माना करें । 
♦ तेलीय या मसालेदार चीज़ों का सेवन एकदम ना करें ।
♦ चावल, दही , अचार , इत्यादि चीज़ों से परहेज़ करें
तो आपने देखा कि हमने अभी तक कई सारे विषयो पर चर्चा किया । आपने देखा कि मलेरिया बीमारी जितनी आम होती है ,  उतनी है नहीं । अर्थात आप  इस खतरनाक बीमारी से बच कर  रहें और दूसरो को भी बताएं ताकि वो भी स्वस्थ रहें  ।  आप को यह पढ़ कर कैसा लगा ये आप कॉमेंट करके जरूर बताएं ।
स्वस्थ रहें ।। मस्त रहें ।।
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Vikash Dubey

Admin

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