क्यों होते हैं ये लोग सफेद ? What is Albinism ? Who are Albinos ? In Hindi

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आपने अपने आस – पास किसी ऐसे व्यक्ति को जरूर देखा होगा जो एकदम से सफेद और गोरे होते हैं । अगर आपने देखा होगा तो आपके मन में सवाल भी आए होंगे कि आखिर कार ये लोग इतने सफेद होते क्यों हैं और कैसे ये सब हो जाते हैं , क्या वजह होती होगी । चिंता मत कीजिए आज हम आपके हर सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे और ऐसे कुछ अफ़वाहों को भी बताएंगे जो इस  समाज में उन लोगों के  बारे में फैलाई जाती हैं लेकिन वैसा कुछ भी होता नहीं है ।
क्यों होते हैं ये लोग सफेद ?? 
हमारा शरीर कई पदार्थो से मिल के बना है । हर एक भाग का अपना – अपना काम होता है । किसी एक काम को करने के लिए केवल एक अंग ही होता है । अगर आपको कोई सामान उठाना है तो ,  आपको अपने हाथ का प्रयोग करना पड़ेगा । अगर  आपको कहीं जाना है , तो आपको अपने पैर का इस्तेमाल करना पड़ेगा ।  हमारे शरीर को काम करने के लिए ऊर्जा चाहिए होती है।  ये ऊर्जा हमें खाद्य पदार्थो के द्वारा  हमारी कोशिकाओं को मिलती है और फिर हमारा शरीर काम करता है।  तो ये सब बाते थीं ,  कुछ अपने शरीर के कार्य करने की विधि ।
दुनिया में हर व्यक्ति काला  या गोरा होता है । लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं ,  जो हद से ज्यादा सफेद होते हैं । इसका मतलब ये नहीं कि वो गोरे हैं । इसका मतलब कि कुछ तो ऐसा है उनके अंदर , जो  उन्हें साधारण व्यक्ति से अलग दिखाता है । यह एक तरह की जेनेटिक डिजीज होती है जिसे हम Albinism कहते हैं।  मतलब – रंगहिनता   । और जो इस बीमारी से ग्रसित होते है उन्हें – Albinos कहते हैं ।
क्या वजह होती है इसकी ?? ( Albinism )
इस संसार में हर मनुष्य का एक निश्चित रंग होता है । ये रंग भी एक तरह का हमारे शरीर में अल्ट्रावॉयलेट रेज के खिलाफ एक बचाव परत कि तरह काम करती है जिसके कारण हमें कई सारी बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ता । अगर ये रंग ना हों तो हमें कई सारे बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है । जैसे स्किन कैंसर , स्किन में छेद , बालों का झड़ना इत्यादि ।  अब बात ये है कि ये रंग कौन डिसाइड करता है हमारे शरीर का ?  हमारे शरीर में  एक मिलेनिन नाम का पिगमेंट होता है  , जो सूरज की किरणों के कारण ज्यादा या कम होता रहता है । जिस व्यक्ति  में मिलेनीन की मात्रा ज्यादा होती है , वो व्यक्ति काले होते हैं और जिस व्यक्ति के  अंदर ये कम  होता है , वो सांवले होते हैं और जिस व्यक्ति के अंदर और कम होता है , वो गोरे होते हैं । पर इसका मतलब ये नहीं कि वो पूरे सफेद होते हैं । पूरे सफेद में और गोरे स्किन में बहुत फर्क होता है ।  रंगहिनता का सबसे बड़ा कारण है उनके शरीर में मीलेनिन का एकदम ना होना ।
कौन – कौन सी समस्याएं होती हैं ?
 
जैसा कि मैंने ऊपर ही बताया कि मीलेनीन का हमारे शरीर में क्या उपयोग है और ये हमें अल्ट्रावॉयलेट रेज़ से भी बचाता है । रंगहीन व्यक्ति में निलेनीन की मात्रा एकदम नहीं होती है , जिनके कारण इन लोगों की चमड़ी सफेद दिखने लगती है । इनकी चमड़ी इतनी कमजोर हो जाती है कि , अगर  इनके ऊपर ज्यादा सूर्य की रोशनी पड़ने लगी तो ऐसे लोगो को स्किन कैंसर होने कि  संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं । पिगमेंट की मात्रा कम होने के कारण इनके आंखो की रोशनी  भी बहुत कम होती है  । इनकी स्किन भी कमजोर होती है ।
क्या है कारण ??
 
इस बीमारी का कोई पक्का इलाज नहीं है ,  और नाहीं ये बीमारी किसी खाश एंटीजन से होती है।   इस बीमारी के कई कारण बताए जाते हैं , जैसे बॉडी में न्यूट्रीशन की कमी होना इत्यादि।  लेकिन इसको  जेनेटिक डिजीज माना जाता है । बताया जाता है कि , अगर किसी परिवार में कोई सदस्य इस बीमारी से ग्रसित है तो वो बीमारी उसके बच्चो में भी ट्रांसफर हो सकती है ।  होता ये है कि उस व्यक्ति के जीन में ही रंगहीनता होती है और वो उसके बच्चो ने ट्रांसफर हो जाती है । और ये बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी चलते जाती है । यह बीमारी लाइलाज है।
बचाव —
 
1- ऐसे लोगों को घर से बाहर धूप में ज्यादा नहीं   निकलना चाहिए । घर के बाहर निकलने से वो अल्ट्रावॉयलेट लाइट के संपर्क में आते हैं  और उन्हें स्किन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है  । उन्हें अपना चेकअप  चिकित्सक से बराबर कराते रहना चाहिए ।
2- अपनी आंखो को बचाने के लिए उन्हें चस्में का इस्तेमाल करना चाहिए  । किसी की समय उन्हें चस्मे को पहने रहना चाहिए जिसके कारण उनकी आंखो को नुकसान ना पहुंचे ।
3- चिकित्सक  से अपनी जांच समय – समय पे कराते रहना चाहिए ।
सामाजिक अफ़वाह—
 
आज ज़माना कितना आगे बढ़ गया , फिर भी कुछ लोग पुराने   ज़माने में जी रहे हैं ।  आज भी लोग इस जमाने में होने के बाद ऐसी कई सारे अफ़वाहों को मानते हैं जो बिल्कुल ही बकवास है । कुछ लोगों का मानना होता है कि रंगहिनता एक बीमारी है और जो व्यक्ति इससे ग्रसित है और जीन लोगों के पास जाता है वो बीमारी उन्हें भी हो जाती है । मैं आपको बता दू ऐसा कुछ भी नही है । यह एक जेनेटिक डिजीज है , जो केवल उनके जीन में गड़बड़ी होने के कारण होती है । यह छूने से कभी नहीं फैलती । यह बीमारी केवल इंसानों में ही नहीं बल्कि पेड़- पौधे और जानवर ईन दोनो में भी होता है ।
कुछ लोग इतने महान होते हैं कि ऐसे लोगो का वो लोग मज़ाक उड़ाते है । उन्हें अलग – अलग नाम से चिढ़ाते हैं  । किसी के आकार – विकार को लेके उसका मज़ाक उड़ाना एक तरह  का पाप ही होता है । कभी भी किसी इंसान का उसके आकार – विकार का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए । कम से कम कुछ कर नहीं सकते तो ,  मज़ाक  तो मत उड़ाओ । मेरा आपसे यह निवेदन है कि कोई भी व्यक्ति कैसा भी है ,  आप उसका सपोर्ट करो कि वो  जैसा भी है यूनिक है । नाकी उसका मज़ाक बना के उसे दुख दो  ।
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Vikash Dubey

Admin

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