क्या नए शिकार ढूंढता है कोरोना वायरस ? Do corona virus search new patient ? In hindi

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तेरह लाख से ज्यादा संक्रमण के मामले और तीस हजार से ज्यादा मौतों के साथ भारत  कोरोना वायरस के घातक चंगुल में फंसे शीर्ष तीन देशों में शामिल है ।  रोजान 40 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं , जिसे विशेषज्ञ  ` घातिय वृद्धि ‘ कहते हैं । भारत में कोविड-19 का समुदायिक प्रसार शुरू हो गया है और आईएमए के अनुसार स्थिति खराब है ।  सामुदायिक संक्रमण तब होता है , जब स्वास्थ्य प्रणाली वायरस संक्रमण के तरीकों का पता नहीं लगा पाती और नए संक्रमण का श्रोत नहीं पता लगाया जा सकता   । यह चिंता का कारण है , क्योंकि सैद्धांतिक रूप से कोई भी व्यक्ति कहीं भी संक्रमित हो सकता है । हालांकि अतीत में भारत में ऐसे मामले सामने आए हैं , जिनके बारे में किसी किसी श्रोत का पता नहीं चला है , लेकिन केंद्र सरकार सामुदायिक संक्रमण से इन्कार कर  रही है । 

हालिया खबर यह है कि कोरोना का संक्रमण हवा के जरिए फैल सकता है और हमेशा मस्क के उपयोग की जरूरत पड़ सकती है , जिसने घबराहट और भ्रम को बढ़ा दिया । 
क्या ताजा लॉकडाउन संक्रमण को रोकने में मदद कर सकता है ?
यह सर्वविदित है कि अन्य स्वसन संबंधी संक्रमण कि तरह कोविड संक्रमण भी विभिन्न आकार के ड्रोपलेट्स  ( थूक या छींक से निकली बूंद ) के जरिए फैल सकता है  । ड्रोप्लेट्स से संक्रमण तब होता है ,  जब कोई व्यक्ति खासने या छींकने वाले व्यक्ति के संपर्क ( एक मीटर के भीतर ) में आता है । संक्रमित व्यक्ति के आसपास के संक्रमित वस्तुओं व सतहों के कारण भी संक्रमण फैलता है ( स्वसन सहायक उपकरण ) के माध्यम से भी फैलता है , जो अस्पताल के आईसीयू कक्ष में होता है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) (WHO)ऐसी परिस्थितियों और आईसीयू कक्षों के लिए लगातार दिशा निर्देश जारी करता है ,  जिसमें इस तरह की प्रतिक्रियाएं चलती हैं ।
हाल में 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने कहा कि इस बात के पक्के सबूत हैं कि वायरस हवा के जरिए बहुत महीन कणों के माध्यम से फैल सकता है , जो लोगों के बात करने व सांस लेने के बाद घंटों हवा में तैरते रहते हैं । अगर इसकी पुष्टि हो जाती है ,  तो इसका मतलब यह हुआ कि संक्रमण का खतरा पहले से कहीं ज्यादा है । डब्ल्यूएचओ के संक्रमण का खतरा पहले से कहीं ज्यादा है ।  डब्ल्यूएचओ के संक्रमण नियंत्रण मामलों के तकनीकी प्रमुख डॉक्टर बेनेडेटा अल्लीग्रांजी ने कहा कि वायरस के हवा में फैलने से साक्ष्य विश्वसनीय नहीं थे । कोरोना वायरस दुनिया भर में नए शिकार ढूंढ़   रहा है  बार – बार  एवं रेस्टोरेंट , ऑफिस , बाज़ार , अस्पताल , संस्थान , कैसिनो में ,और संक्रमण के भयावह समूहों को जन्म दे रहा है ,जो उसी बात की पुष्टि कर रहा है , जिसके बारे में वैज्ञानिक महीनों से का रहें है कि वायरस घर के भीतर हवा में देर तक रहता है । स्कूलों , नर्सिंग होम, घरों एवं व्यवसायिक  प्रतिष्ठानों में वेंटिलेशन सिस्टम में हवा के परिसंचरण को न्यूनतम करने और नए शक्तिशाली फिल्टर लगाने की जरूरत है ।  घर के भीतर महिन ड्रॉप्लेट्स में तैरने वाले वायरस को खत्म  करने के लिए पराबैगनी प्रकाश की आवश्यकता  हो सकती है । कई विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ को   उस विचार को अपनाना चाहिए  , जिसे कुछ लोग ‘ एहतियाती सिद्धांत ‘ कहते हैं , तो कुछ लोग  ‘ जरूरत और  मूल्य ‘ बताते  हैं । वह विचार यह है कि निश्चित प्रमाण के बिना भी एजेंसी को वायरस को सबसे बुरा मानना चाहिए , और सर्वोत्तम सुरक्षा की सिफारिश करने चाहिए । 
अप्रैल में डब्ल्यूएचओ ने कहा था  कि अभी इसका कोई सबूत नहीं है कि   लोग कोवीड -19 से ठीक हुए हैं और एंटीबॉडीज हैं , वे दूसरे संक्रमण से सुरक्षित हैं । इस बयान का मकसद अनिश्चितता को दर्शाना था  । दूसरी बार संक्रमण की कुछ खबरें आती हैं , जिसका मतलब है कि वायरस ने उस व्यक्ति की प्रतिरक्षा की गतिरक्षा  प्रणाली खराब कर दी थी ।
कई लोगो का मानना है कि शौचालय के प्लश से संक्रमित  कणों  को सांस के जरिए लेने से कोरोना वायरस का खतरा इतना कम है कि उसे नगण्य माना जा सकता है  । दूषित टॉयलेट सीट पर बैठना कोरोना  – वायरस   संक्रमण के लिए एक ज्ञात जोखिम नहीं है । लेकिन ध्यान रखें सीट को छूने के बाद अपने हाथों के चेहरे से दूर रहना महत्वपूर्ण है ।
इसलिए घर में रहे और सुरक्षित रहें ।।

Vikash Dubey

Admin

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