कर्म क्या होता है ? What Is Karma ? in hindi

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आज हम एक नए विषय पर चर्चा करेंगे जो शायद हमारे और भी पोस्ट से अलग है लेकिन , सेहत का मतलब केवल शरीर से ही स्वस्थ रहना नहीं है बल्कि मानसिक स्वस्थ्य भी बहुत ही जरुरी है |
आज हम आपको जीवन का एक मुख्य पथ बताने का प्रयाश करेंगे , जिसपर आप चलकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे |

एक बार गौतम बुद्ध से उनके शिष्य ने पूछा कि , गुरु जी , कृपया हमे बताईये कि कर्म क्या है ? गौतम बुद्ध ने अपने शिष्य से कहा कि कर्म को समझने के लिए मैं तुम्हे एक कहानी सुनाता हूँ और इस कहानी से तुम समझ जाओगे की कर्म क्या है ? और दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको वही कहानी बताने वाले हैं जो गौतम बुद्ध ने अपने शिष्य को सुनाई थी | और अगर आपको यह जान के कुछ सिखने को मिले तो जरुर औरो के साथ इसे शेयर करें | आईये सुरु करते हैं |


गौतम बुद्ध अपने शिष्य को कहानी सुनाते हैं –

कि बुलंदशहर का एक राजा था | और एक दिन वो अपने घोड़े पर बैठकर अपने राज्य का ब्रम्हण कर रहा था | चारो तरफ ब्रह्मण करने के बाद वो एक दुकान के सामने आकार रुक गया | रुकने के बाद राजा ने अपने मंत्री से कहा कि मंत्री जी मालूम नहीं क्यूँ मुझे लगता है कल – के – कल फांशी कि सजा सुना दूँ , इसे मृत्यु दण्ड देने की मुझे इच्छा हो रही है | मंत्री राजा से इसका कारण पूछ पाते इससे पहले राजा आगे निकल गए | मंत्री ने इस बात का कारण पता करने के लिए अगले दिन सुबह भेष बदलकर दुकानदार के पास जा पंहुचा | वैसे दुकानदार चन्दन कि लकड़ियाँ बेचने का काम करता था | मंत्री ने दुकानदार से पूछा की भाई आपका काम कैसा चल रहा है ? दुकानदार ने बताया कि उसका बहुत ही बुरा हाल है , लोग उसकी दुकान पर तो आते हैं और चन्दन को सूंघकर उसकी प्रसंसा बहुत ज्यादा करते हैं लेकिन खरीदता कोई भी नहीं | उसने आगे बताया कि मैं बस इसी इंतज़ार में हूँ कि कब हमारे राज्य के राजा कि मृत्यु हो जाये और उनके अंतिम संस्कार के लिए मुझसे बहोत सारी चन्दन की लकड़ियाँ खरीद ली जाये और शायद वहां से मेरा व्यापर में और भी बढ़ोतरी हो जाएगी और मेरा व्यापर भी अच्छा हो जायेगा | मंत्री को सारी बात समझ आ गयी कि यही वो नकारात्मक विचार है जिसने राजा के मन को भी नकारात्मक कर दिया है | मंत्री बहुत ही बुद्धिमान था इसलिए उसने सोचा कि मैं थोड़ी बहुत चन्दन की लकड़ियाँ खरीद लेता हूँ , उसने दुकानदार से कहा कि मैं आपसे थोड़ी – बहोत चन्दन कि लकड़ियाँ खरीद सकता हूँ , दुकानदार ये सुनकर बहुत खुश हो गया , उसने सोचा कि चलो कुछ तो बिका ! इतने समय से कुछ भी नहीं बिक रहा था | उसने चन्दन कि लकड़ी को कागज से लपेटा और और अच्छी तरह से पैकिंग करके मंत्री को देदी | मंत्री अगली सुबह चन्दन की लकड़ी लेकर राजा के दरबार में पहुँच गया और राजा से कहा कि महाराज वो जो दुकानदार है उसने आपको तोहफे के रूप में कुछ चन्दन कि लकड़ियाँ भेजी हैं | ये सुनते ही राजा बहुत खुश हुए और मन – ही – मन सोचने लगे कि मैं बेकार में ही उस दुकानदार के बारे में गलत बातें सोच रहा था | उसने चन्दन की लकड़ी को हाँथ में लिया , उसने बहोत ही अच्छी तरह से उसे सुंघा , उसमे से बहुत ही अच्छी सी सुगंध आ रही थी | राजा इससे बहोत ज्यादा खुश हुए और उस राजा ने मंत्री के हाथों से उस दुकानदार के लिए सोने के सिक्के भिजवा दिए | उसी आम जनता का रूप लेकर मंत्री अगले दिन सोने के सिक्के के साथ उस दुकानदार के पास पहुंचा | दुकानदार बहुत ही खुश हुआ | उसने सोचा कि मैं राजा के बारे में कितनी गलत बातें सोच रहा था , राजा तो बहुत ही दयालु हैं | और यहीं पर गौतम बुद्ध ने कहानी ख़तम कर दी | ये कहानी जब ख़तम हुई तब गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों से पूछा कि अब आप बताईये कि कर्म क्या होता है ? शिष्यों ने उत्तर देते हुए कहा कि शब्द ही हमारे कर्म हैं | हम जो काम करते हैं वही हमारे कर्म हैं | जो हमारी भानावायें हैं वही हमारे कर्म हैं | गौतम बुद्ध ने सभी शिष्यों का जवाब सुनने के बाद , ये कहा कि विचार ही आपके कर्म हैं | अगर आपने , अपने विचारों पर नियंत्रण करना सिख लिया तब आप एक महान इंसान बन जाते हैं | जब आप अच्छा सोचते हैं , तब आपके साथ अच्छा होता ही है , और वो होता ही रहेगा | इसलिए मै भी कहना चाहूँगा कि अगर आप अच्छा सोचोगे तो दुसरे लोग भी आपके बारे में अच्छा सोचने लग जायेंगे |

यह जानकर आपको कैसा लगा ये हमें कमेंट करके जरुर बताएं | आशा करता हूँ यह जानकर आपको बहुत कुछ सिखने को मिला होगा | महात्मा बुद्ध कि यह बात अपने तक ही सिमित ना रखें इसे और लोगों तक पहुचाएं | आपके विचार में कर्म क्या है ? यह हमें कमेंट करके जरुर बताएं |
आपका बहुमूल्य समय देने के लिए आपका —
धन्यवाद

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Vikash Dubey

Admin

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